बात उस समय की है जब मैं कॉलेज में पढ़ाई करता था। मेरे फाइनल के एग्जाम खत्म हो गए थे और मैं उदयपुर से अपने नेटिव प्लेस सूरत आ रहा था। ट्रेन शाम को 4 बजे थी। मैं सही समय पर स्टेशन पहुंच गया था। मेरी सीट साइड लोअर थी। मैं ट्रेन में बैठा और सोच रहा था कि आगे क्या करना है। वैसे ट्रेन में कोई खास भीड़ नहीं थी। जैसे ही ट्रेन चली, मैंने देखा कि एक औरत, करीब 30-32 साल की, आई और बोली कि आपकी सीट कौन सी है। मैंने कहा 11 नंबर। उसने अपनी टिकट देखी, वो 12 नंबर की थी, यानी साइड अपर। उसके साथ उसका एक 3 साल का लड़का था, जो विंडो पर आकर बैठ गया। उसने कहा, “क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं सामान रखने में?” मैंने मदद की और सारा सामान सीट के नीचे रख दिया। वो अपर सीट पर जाकर बैठ गई। उसका लड़का नीचे ही बैठा था और मेरे साथ खेल रहा था। ट्रेन चलती गई। एक घंटे बाद पहला स्टेशन आया तो वो नीचे उतर गई और चायवाले को आवाज देने लगी। उसने चाय ली, मैंने भी चाय ली। जब वो पैसे दे रही थी तो मैंने कहा, “मैं दे देता हूं,” और...